IAS एक सुनहरा ख्वाब: जो लाखों युवाओं के दिल में पलता है।

 Mohammad Firoz

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🚨#"गलतियाँ जिनकी वजह से #असफल होते हैं हम"..✍🏻
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IAS एक सुनहरा ख्वाब: जो लाखों युवाओं के दिल में पलता है।




इसको पूरा करने के लिए हर एक अभ्यर्थी जी जान लगा देता है लेकिन उनमें से कुछ ही सफल हो पाते हैं बाकी लोगों के लिए ये मात्र एक ख्वाब ही रह जाता है। क्या सिर्फ कड़ी मेहनत करना हमें IAS बना सकता है?तो मेरा जवाब है-"नहीं"। IAS बनने के लिए कड़ी मेहनत के साथ बहुत कुछ और भी चीज हैं जिनका हमें ध्यान रखना चाहिए। आज मैं उन गलतियों को आपके सामने रख रहा हूँ जो हमारी सफलता के आड़े आती हैं। इन गलतियों की वजह से या तो सफलता देर से मिलती है या कई बार समय निकल जाता है लेकिन सफलता नहीं मिल पाती।

गलत शुरुआत: .अक्सर जब तैयारी के क्षेत्र में आते हैं तो जोश इतना होता है कि बिना कुछ जाने और समझे बस जुट जाते हैं तैयारी में। लेकिन वो सिर्फ आपका जोश है और आपको जोश के साथ  इच्छाशक्ति,अटूट विश्वास,मानसिक रूप से हार को सहन करने की शक्ति की भी आवश्यकता होती है। आपका पहला कदम परीक्षा के बारे में सम्पूर्ण जानकारी, सिलेबस की सम्पूर्ण जानकारी लेना होना चाहिए।

गलत माध्यम का चयन: हिंदी भाषी या अन्य क्षेत्रीय भाषाओं से तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के मन मे ऐसी धारणा बन चुकी है कि अगर सिलेक्शन होगा तो सिर्फ अंग्रेजी विषय से इसलिए अंग्रेजी विषय का चयन करें।खैर ये बात सच है कि सफल विद्यार्थियों में सर्वाधिक प्रतिशत अंग्रेजी भाषा रखने वालों का है लेकिन हिंदी भाषा से चयन कम होने के बहुत सारे कारण हैं।आप उस भाषा का चयन करें जिस भाषा मे आप अच्छा लिख सकते हैं।क्योंकिं मुख्य परीक्षा में अंक भाषा के चुनाव से नहीं आपके उत्तर लेखन से मिलते हैं।

गलत वैकल्पिक विषय का चयन: अक्सर देखा है कि लोग अपने वैकल्पिक विषय का चयन पिछले वर्षों में उस विषय के कितने अभ्यर्थी सफल हुए उनकी संख्या को देख कर करते हैं जो कि सबसे बड़ी गलती है विषय का चयन अपनी रुचि के हिसाब से करें जिस विषय मे आप सहज महसूस करें और अपने प्राप्त ज्ञान को परीक्षा में बेहतर तरीके से लिख सकें उस विषय का चयन करें।

गलत मार्गदर्शन : गलत मार्गदर्शन आपके जीवन के कुछ बहुमूल्य वर्षों का विनाश कर सकता है।इसलिए हर किसी के अंधभक्त ना बने और अपनी बुद्धि विवेक का भी अनुशरण करें।ये सही है कि एक सफल व्यक्ति आपको सफलता के लिए दिशा बताएगा लेकिन एक असफल व्यक्ति आपको उन गलतियों को बताएगा जिनका वो साक्षी रहा है।और ये दोनों बातें जानना आपके लिए जरूरी है।. जब कि अधिकांश विद्यार्थी कोचिंग में लगे हुए फोटो को देखकर एडमिशन ले लेते है जबकि एडमिशन गुणवत्ता देखकर लेना चाहिए ना कि फोटो देखकर... क्योंकि फोटो खरीदकर लगाने का चलन वर्तमान में अधिक है

गलत अध्ययन सामग्री: तैयारी में आते ही लोग इस मायाजाल में उलझ जाते हैं और 100% सफलता की गारंटी देनी वाली किताबें,चमत्कारी नोट्स इत्यादि  खरीद कर अपनी रैक सजाने लग जाते हैं।जबकि आपको NCERT के साथ प्रत्येक विषय से 2-3 अपेक्षित किताबें और 2-3 मासिक पत्रिकाएं पूर्व वर्ष के हल प्रश्न पत्र चाहिए होती हैं परीक्षा के निकट टेस्ट सीरीज जॉइन करनी चाहिए या हल करनी चाहिए।नोट्स के पीछे की दीवानगी भूल जाओ अगर परीक्षा पास करनी है तो। किसी भी 1कोचिंग के नोट्स और किसी अनुभवी अभ्यर्थी के ऐसे नोट्स जो upsc का पूरा सिलेबस कवर करते हैं और आपकी समझ मे आ रहे हैं काफी हैं।

गलत रणनीति: बहुत से लोग कोई भी रणनीति नही बनाते या फिर गलत बना लेते हैं लोगों से पता करके या फिर इंटरनेट की सहायता से सभी अच्छे अच्छे लेखकों की किताबें ले लेते हैं और बस लग जाते हैं ऐसा नहीं करना चाहिए। हमे करना चाहिए कि सबसे पहले NCERT की वो सभी किताबें खरीदें जो आवश्यक हैं और सबसे पहले वो पढ़ें कम से कम 2-3 बार साथ मे पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र पर नज़र डालते रहें।जब आपका बेसिक मजबूत हो जाये फिर उठाएं सभी रेफरेंस किताबों को।

पढ़ने का गलत तरीका: बहुत मित्रों को देखा है जो बस दिन रात पढ़ने में लगे रहते हैं लेकिन फिर भी किसी भी परीक्षा का प्रीलिम पेपर तक पास नही हो पाता। हम कितने घंटे पढ़ रहे हैं ये मायने नहीं रखता।हम क्या पढ़ रहे हैं और कैसे पढ़ रहे हैं ये मायने रखता है।आप एक बार मे 2 विषय उठाइये और दिन में जितने घंटे पढ़ते हैं उनको 2-2 घंटे के स्लॉट्स में बांटिए। जैसे कि आप 8 घंटे पढ़ते हैं तो इसको 4 भागों में बांट लीजिये और 2 घण्टे का एक स्लॉट, समसामयिकी,न्यूज़पेपर,कंटेम्प्रेरी इस्यू आदि को दीजिए और 2 घंटे का समय अपनी वैकल्पिक विषय को दीजिए। बाकी 2-2 घंटे के 2 स्लॉट्स 2 विषय जो आपको पढ़नी हैं उनको दीजिए और हर 2 घंटे की पढ़ाई के बाद थोड़ा दिमाग को आराम दीजिए।

निरंतरता की कमी: अक्सर जब हम जोश में होते हैं तो निरंतर 10-12 या अधिक घण्टे पढ़ाई करते हैं लेकिन बीच बीच मे 5-10 दिन का गैप कर लेते हैं जो कि गलत है।आप अपना रोजाना का एक दिनचर्या बनाइए।अग

र जॉब करने वाले हैं तो उसके हिसाब से या फिर सिर्फ तैयारी करने वाले हैं तो वो भी उसके हिसाब से बनाएं और दृढ़ता से अनुसरण करें।

सोशल जीवन का त्याग: ये सही है कि यदि आपको अपना अधिकतम समय पढ़ाई को देना है तो सोशल जीवन से थोड़ा दूरी बना लेने में ही भलाई है लेकिन पूरी तरह से मित्र और परिवार से दूर मत होइए।क्योंकि जब अकेलापन महसूस होगा तो आप डिप्रेशन में चले जायेंगे वो ज्यादा खतरनाक स्थिति होगी,इसलिए पढ़ाई और समाज के बीच संतुलन बनाये रखिए।

अपने शौक,खुशियों और व्यक्तित्व का त्याग: ये सोचना गलत होगा कि हमे सफल होना है तो हमारी जिंदगी में मौज मस्ती की कोई जगह नहीं जबकि होना ये चाहिए कि आप थोड़ा घूमिए,फिरिये,मनोरंजन कीजिए गाना बजाना या फिर कोई खेल जो आपके शौक हैं सब कीजिए लेकिन एक सीमा के अंदर रहकर।सप्ताह में एक दिन या 2 सप्ताह में एक दिन कुछ घंटे आप खुद की खुशियों को भी दीजिए।जब हमारा मन खुश रहता है और दिमाग शांत रहता है तो हमारे दिमाग की क्षमता का हम पूर्ण इस्तेमाल कर सकते हैं। यही कारण है कि पढ़ाई के साथ मौज मस्ती और खुश रहने वाले लोग जल्दी सफल होते हैं। हम गधे नहीं हैं जो बस एक ही काम करना है।
स्मार्ट स्टडी करिए और पढ़ाई को एन्जॉय करिए।

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